इंटरव्यू देने बिना टिकट ट्रेन में चढ़ गया था ये लड़का,टिकट चेकर ने अपनी जेब से भर दिया जुर्माना

New Delhi: आमतौर पर ट्रेन पर बिना टिकट चढ़ो तो समझ जाओ की टिकट चेकर के रूप में आपके सामने आफत आने ही वाली है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सच्ची कहानी बताएंगे जिसे ना तो आज तक आपने कहीं सुना होगा और ना ही कभी देखा होगा।
फेसबुक पर ब्रजेश नाम के शख्स ने ये पोस्ट डाला था जो धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। हर कोई इस पोस्ट पर बिना सलाम लिखे…बिना इस पोस्ट को पढ़े नहीं रह पा रहा है। भाई…इस पोस्ट की बात ही ऐसी है। दरअसल, कुछ महीने पहले की बात है। शताब्दी एक्सप्रेस से ब्रजेश भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे। उनके ठीक सामने एक लड़का बैठा हुआ था, वह बहुत देर से परेशान था। अब परेशानी की वजह तो बस वो लड़का ही बता सकता है।

लड़के की परेशानी वक्त के साथ बढ़ती जा रही थी, तभी अचानक से एक महिला टिकट चेकर उसी डिब्बे पर चढ़ी। अब महिला टिकट चेकर पहुंची उसी लड़के के पास। लड़के और चेकर के बीच काफी देर तक बात हुई या यूं कह लो दोनों के बीच बहस होने लगी। अचानक से आवाज का लेवल बढ़ गया। महिला चेकर चीख चीख कर कह रही थी, अगर जुर्माना नहीं भरा तो अगले स्टॉप पर पुलिस के हवाले कर दूंगी। बाद में पता चला कि लड़का बिना टिकट के ट्रेन में बैठा था।

लड़का किसी इंटरव्यू के लिए ग्वालियर जा रहा था। ये इंटरव्यू देना उसके लिए बहुत जरूरी था। उस लड़के ने बताया कि घरवालों ने उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर तो किए हैं लेकिन उब तक पैसे उसके अकाउंट में पहुंचे नहीं है। यही वजह थी कि वह बिना टिकट ट्रेन में चढ़ा और जुर्माने के लिए भी उसके पास पैसे नहीं थे। अगर वो टिकट चेकर उसे उतारे बिना ट्रेन में जाने देती है तब भी उसे 3200 रुपए जुर्माने के तौर पर भरना पड़ेगा, जो उसके पास है नहीं। ऐसे में उसे ट्रेन से उतारकर पुलिस के हवाले करना पड़ता। तभी अचानक वहां एक और टिकट चेकर महाशय आ गए। लेकिन इस बार टिकट को लेकर बहस नहीं हुई बल्कि अब वो हुआ जो शायद किसी ने सोचा नहीं था।

दूसरे टिकट चेकर ने उस लड़के की पूरी कहानी सुनी। फिर अपनी जेब से पैसे निकालकर उस लड़के के हाथ में रख दिए और कहा कि भर दो जुर्माना। लड़का तुरंत सीट से खड़ा हुआ और हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया। वो टिकट चेकर हल्का सा मुस्कुराए और आगे बढ़ गए। जैसे ही वह आगे बढ़े कुछ लोगों ने उनसे पूछा क्या आपको लगता है कि आपको आपके पैसे वापस मिलेंगे। जवाब में उन्होंने कहा, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैंने ये सोचकर मदद की कि क्या कोई अपना होता, तब भी हम इतना सोचते। इसके बाद वो आगे कहीं निकल गए। शायद किसी और की मदद करने।

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