प्रमोद महाजन के कहने पर भाजपा से जुड़े थे वरुण गांधी, इन गलतियों से दूर हुई ‘यूपी सीएम की कुर्सी’

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी के सुल्तानपुर सीट से सांसद और कांग्रेस के बड़े नेता रहे संजय गांधी के बेटे वरुण गांधी की गिनती उन नेताओं की सूची में की जाती है
जिन्होंने देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद अभी तक राजनीति में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं किया। लेकिन, उनकी मां मेनका गांधी ने अपनी राजनीतिक पारी में आगे बढ़ते हुए भाजपा के मंत्रिमंडल में खास जगह बनाई।

आज के समय में लोगों को यह जानकर आश्चर्य तो होता ही है कि देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार और विपक्षी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले वरुण गांधी भारतीय जनता पार्टी के साथ कैसे जुड़ गए। इसके अलावा वो कौन सी गलतियां थीं, जिनके कारण वरुण गांधी भाजपा में तो शामिल हो गए, लेकिन यूपी सीएम की कुर्सी हासिल करते-करते रह गए।

जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रमोद महाजन ने वरुण गांधी को भाजपा में शामिल होने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवानी के सामने इसका सकारात्मक पहलू भी रखा था कि अगर हम गांधी परिवार के किसी सदस्य को शामिल कर लेंगे तो हमें काफी आसानी होगी और राहुल गांधी को कड़ी टक्कर भी दे पाएंगे।

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोद महाजन ने भाजपा में शामिल होने के लिए वरुण गांधी को बहुत मनाया। शायद उनके लिए ये अब तक का सबसे मुश्किल काम था, लेकिन प्रमोद महाजन ने समझाया कि कांग्रेस में सिर्फ राहुल गांधी को ही बढ़ाया जाएगा, ऐसे में तुम भाजपा में प्रथम श्रेणी के नेता बन सकते हो। अगर राहुल गांधी के खिलाफ खड़े होंगे तो वैसे भी बड़े होंगे। अपने एक व्यक्तिगत बयान में वरुण गांधी ने कहा था कि मुझे वाजपेयी और आडवानी ने कहा था कि हम सब ठीक कर देंगे, लेकिन ऐसा कुछ किया नहीं।

इन गलतियों के कारण छिन गई यूपी सीएम की कुर्सी: साल 2013 में भाजपा से पीएम पद की उम्मीदवार के रूप मोदी का नाम प्रस्तुत करने से पहले लाल कष्ण आडवानी के लिए एक रैली का आयोजन किया। भाजपा से पीएम उम्मीदवार मोदी का नाम सामने आने के बाद 4-5 दिन तक वरुण गांधी नरेंद्र मोदी ने नहीं मिले। वहीं अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान भी वे सिर्फ बार ही औपचारिक रूप से मोदी जी से मिले हैं।

इसके बाद वरुण गांधी की दूसरी गलती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान हुई, जब उन्होंने इलाहबाद में होने वाली बैठक के लिए पूरे शहर में पोस्टर लगवाए थे। जिसमें वरुण गांधी ने खुद को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि, यूपी से कई बार वरुण गांधी को सीएम पद पर पहुंचाने की मांग भी उठी थी। लेकिन, वे असल राजनीति और सत्ता के सुख से वंचित ही रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *